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रविवार, 10 अप्रैल 2011

संपर्क फरवरी २०११ - थोड़ी सी खुशी भिजवा दो

एक पति ने पत्नि से कहा, "देखो चाँद कितना खूबसूरत लग रहा है।" बीवी बोली, "कोई नई बात करो। यह तो रोज़ ही निकलता है। दवाई खा ली तुमने? खालो नहीं तो फिर भूल जाओगे।" पति बोला, "अभी खाता हूँ।" पत्नि ने फिर पूछा, "क्या आज छुटके का फोन आया था?" पति बोला, "हाँ आया था। कह रहा था, बता देना; किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो, भिजवा दूंगा।" पत्नि ने जवाब दिया, "कह देते कि भिजवा सकता है तो थोड़ी सी खुशी भिजवा दे।"

जीवन में इतना सब पाया और इतना कमाया, फिर भी इतने कंगाल हैं कि खुशी के लिये तरसते हैं। क्योंकि खुशी कभी पैसे से नहीं खरीदी जाती। लोग खुशी पाने के लिये बहुत पैसा खर्च कर डालते हैं। जब जीवन में कोई खुशी नहीं बचती तो तब आदमी मौत माँगने लगता है।

जीवन की सच्चाई इतनी सख्त होती है कि आदमी बिखर जाता है। जैसे जीना चाहता है, वैसा जी नहीं पाता। जैसे सोचता है, वैसे नहीं होता। वह सब सहना पड़ता है जिसके बारे में कभी सोचा नहीं था। आखिर आदमी इतना बेचैन क्यों है? बीमारियों ने, परेशानियों ने, खामियों ने और कमियों ने उसे सारी खुशियों से खाली कर डाला है। आदमी करे तो क्या करे? मन माने या न माने, पर आप सच तो जानें। हर परेशानी की जड़ में पाप है जो हमारी खुशियों को घुना की तरह खा जाता है। कहीं पाप के श्राप से आपकी खुशियाँ तो नहीं खो गईं?

पाप के जैसी मनहूस कोई और चीज़ है ही नहीं। हमारा एक पाप हमें निकम्मा बना देता है। हममें से ऐसा कोई भी नहीं जिसमें पाप न हो; और इस पाप को कम करना या खत्म करना यह आदमी के बस की बात नहीं, और न ही किसी धर्म के बस की बात है। अगर इसाई धर्म ही आदमी को अच्छा बना सकता तो संसार में ३ अरब आदमी तो अच्छे होते! दुनिया में पाप बढ़ता जा रहा है, और जहाँ पाप है वहाँ श्राप है। पाप ने इस दुनिया को इतना भयानक बना दिया है कि क्या जाने कौन कब आपके साथ क्या कुछ कर डाले। लाखों बच्चों और औरतों के साथ ऐसे ज़ुल्म किये जाते हैं जिनको सुनकर रौंगटे खड़े हो जाते हैं। दुनिया दरिंदों से भरी पड़ी है।


वहाँ, जहाँ से फिर कभी कोई नहीं लौटा


धर्म भी इतना अन्धा कर देता है कि लोग मुर्दों की कब्र पर कपड़ों की बड़ी-बड़ी चादरें चढ़ाते हैं, पर वहीं खड़े नंगे और ठंड से कांपते भिखारी को वे देख नहीं पाते।

धार्मिक दंगों में एक गर्भवती महिला का पेट चीरकर मार डाला, और उसकी बेटी को निकालकर आग में डाल दिया। इस तरह कितना इन्सानी लहू बहाया जा रहा है, और वह लहू चीख रहा है। क्या यह सब परमेश्वर देख रहा है? सह रहा है? आखिर क्यों? आखिर वह क्यों कुछ नहीं करता? वह करने को तो पल भर में सब कुछ कर डाले। पर चाहता है कि कोई एक भी नाश न हो; किसी तरह पश्चाताप करके बच जाए। वह बरदाशत कर रहा है, पर आदमी नरक जाने से पहले ही इस दुनिया को नारकीय बनाने में जुटा है। नरक वह स्थान है जहाँ एक बार जाकर फिर कभी कोई वापस नहीं आ सकता।

हमारी अकड़ हमें झुकने नहीं देती। जो झुक नहीं सकता वह अपने मन में देख नहीं सकता। हमारा मन भी मानता नहीं, हमें धोखा देता है और झुकने नहीं देता। क्या आप आज अपनी ज़िन्दगी से, घर से खुश हैं, संतुष्ट हैं? क्या सब ठीक हो जाएगा? या आप इस विचार से खेल रहे हैं कि जो होगा देखा जाएगा। जिसे अपने किए पर कोई अफसोस नहीं होता वह कैसे पश्चाताप करेगा?


अपनों को पराया बना लिया


जो आप अपने बारे में सोचते हैं वो सब आपके लिए अच्छा नहीं है। मैं आप से पूछता हूँ, आपके शब्द कैसे हैं, वह जो आप अपनी पत्नि से, पति से, अपने बच्चों से, परिवार में और अपने पड़ौस में बोलते हैं? क्या आप अपने शब्दों से दूसरों का अपमान कर के बदला लेते हैं? यही शब्द अपनों को पराया बना देते हैं और दिलों में दूरियाँ ले आते हैं। शायद आपके साथ बहुत बुराई की गयी। जो बुरा आपके साथ हो रहा है, उस बुराई को सोचकर आप और ज़्यादा बुराई से भरते चले जाएंगे और कभी बाहर नहीं आ पाएंगे। बदले की जलन से जलते रहेंगे, जिससे आप अपनी खुशियों को खत्म कर डालेंगे।

अगर आप फैसला कर लें कि मैं इस बुराई से बाहर निकलूँगा, तभी आप इन बुराईयों से बाहर आ सकते हैं। परमेश्वर का वचन कहता है, "बुराई को भलाई से जीत लो" (रोमियों १२:२१)। अभी प्रार्थना करें, "हे प्रभु यीशु, जिन्होंने मेरा बुरा किया है, मैं उनके लिए कुछ भला कर सकूँ। मैं उनके लिए भी भला सोच सकूँ। शायद आपके शत्रु इतने असहाय हों कि वे अपने लिए प्रार्थना भी न कर पाते हों। आप उनकी मदद कीजिएगा और उनके लिए प्रार्थना कीजिएगा। ढूँढिएगा उस मौके को जहाँ आप उनकी भलाई कर सकें। अगर आज आप भलाई बोएंगे तो आप भलाई ही को काटेंगे। यही नहीं, वहाँ भी आपके लिए भलाई ही होगी।

अभी इसी समय एक प्रार्थना करके फैसला लें।

बहुत सारे विचार चुप रहने को कहेंगे, लेकिन अगर आप परमेश्वर से बात कर लें तो बात बन जाएगी। अभी कहकर तो देखें, नहीं तो देरी दूरी बढ़ा देगी। ज़िन्दगी बहुत ही बेवफा है, कब दग़ा दे जाए, मालूम नहीं।

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